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साथियों आज आफिस से भारी मन से लौटा मै....!!! एक जानी पहचानी उदासी थी....उस पर भरे ट्रेफिक के बीच दर्शन लाल चौक पर एक ६-७ साल का बच्चा ..टिस्सू पेपर खरीदने की जिद करने लगा...बारिश थी शीशा नहीं खोल पाया मै...पर उसके बदबुदाते हुए होंठ और आँखों में झलकती हुई..बेबसी को...समझते हुए भी गाड़ी बढ़ा दी....!!
..१०० मीटर आगे चलकर ..मन हुआ... खरीद लूँ....मगर ऐसा नि कर पाया मै..हाँ सोचों ने दामन से मेरी आँखों में कुछ तस्वीरे उकेर दी....!!!
....क्या मैं या कोई भी इन्सान ...रोज एक पाकेट खरीद के ..ये सब बेबसी /गरीबी मिटा सकता है...?..बिलकुल नहीं...बेचने वाले .तो शो रूम में भी बैठे है...आदमी कोम्फेर्ट होके...वहां से खरीद सकता है....!!!
...कुल मिला के लब्बोलुआब ये है...कि..हम सोच बैठे हैं.,..कि हम कुछ बदल नहीं सकते...!! मगर ऐसा नहीं है...हम अपने घर में बैठ के भी...दुनिया बदल सकते है.....हम हमेशा ये सोचते हैं..कि नई जनरेशन ..बिगड़ रही है..बदतमीज हो रही है ....
..उनके आगे उदहारण कौन लोग है....?.जो भी हो...संस्कारों के संवाहक हम लोग ही है...हम जो उन्हें देते है ..वो सूद-ब्याज सहित...हमें लौटाते है....!!
आप चाहे तो ....बस आगे कि कुछ लाइन ..बेमन से ही सही ..पढ़ लीजिये....!!
........बहुत बच्चे...वक्त से पहले...अपने पापा के जूते पहन लेते हैं....उन्हें "स्कूल शूज" के लिए तरसाइए...!!!.उन्हें ललचाइये कि ये "स्कूल शूज" आप के पैरो में जादा अच्छे लगते हैं...अपने पास पड़ोस या किसी सामाजिक संस्था जो इस तरह के काम में लगी हो...प्रोत्साहित करिए...!!..किसी बच्चे की सरकारी स्कूल फीस .भरने का जिम्मा भी ले लेंगे....तो समझ लीजिये की आपने एक अच्छा इन्सान बना लिया दुनिया में...क्यूँकि जिंदगी भर के लिए उसके दिल में अच्छाई के बीज बो दिए आपने...!!
............भीख नहीं ...सही हाथो.. में ...सही काम के लिए दान दीजिये....अपने इंसान होने का सबूत दिखाइए...अगर कही ईश्वर है तो उस को जबाब देने का माद्दा रखिये.....!!!और हम में से कुछेक इन्सान भी ये कर बैठे..तो समझिये...अपने भविष्य को संवार दिया हमने...!!
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.........आपको जो शांति मिलेगी उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है.......!!!.
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साथियों आज आफिस से भारी मन से लौटा मै....!!! एक जानी पहचानी उदासी थी....उस पर भरे ट्रेफिक के बीच दर्शन लाल चौक पर एक ६-७ साल का बच्चा ..टिस्सू पेपर खरीदने की जिद करने लगा...बारिश थी शीशा नहीं खोल पाया मै...पर उसके बदबुदाते हुए होंठ और आँखों में झलकती हुई..बेबसी को...समझते हुए भी गाड़ी बढ़ा दी....!!
..१०० मीटर आगे चलकर ..मन हुआ... खरीद लूँ....मगर ऐसा नि कर पाया मै..हाँ सोचों ने दामन से मेरी आँखों में कुछ तस्वीरे उकेर दी....!!!
....क्या मैं या कोई भी इन्सान ...रोज एक पाकेट खरीद के ..ये सब बेबसी /गरीबी मिटा सकता है...?..बिलकुल नहीं...बेचने वाले .तो शो रूम में भी बैठे है...आदमी कोम्फेर्ट होके...वहां से खरीद सकता है....!!!

..उनके आगे उदहारण कौन लोग है....?.जो भी हो...संस्कारों के संवाहक हम लोग ही है...हम जो उन्हें देते है ..वो सूद-ब्याज सहित...हमें लौटाते है....!!
आप चाहे तो ....बस आगे कि कुछ लाइन ..बेमन से ही सही ..पढ़ लीजिये....!!
........बहुत बच्चे...वक्त से पहले...अपने पापा के जूते पहन लेते हैं....उन्हें "स्कूल शूज" के लिए तरसाइए...!!!.उन्हें ललचाइये कि ये "स्कूल शूज" आप के पैरो में जादा अच्छे लगते हैं...अपने पास पड़ोस या किसी सामाजिक संस्था जो इस तरह के काम में लगी हो...प्रोत्साहित करिए...!!..किसी बच्चे की सरकारी स्कूल फीस .भरने का जिम्मा भी ले लेंगे....तो समझ लीजिये की आपने एक अच्छा इन्सान बना लिया दुनिया में...क्यूँकि जिंदगी भर के लिए उसके दिल में अच्छाई के बीज बो दिए आपने...!!
............भीख नहीं ...सही हाथो.. में ...सही काम के लिए दान दीजिये....अपने इंसान होने का सबूत दिखाइए...अगर कही ईश्वर है तो उस को जबाब देने का माद्दा रखिये.....!!!और हम में से कुछेक इन्सान भी ये कर बैठे..तो समझिये...अपने भविष्य को संवार दिया हमने...!!
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.........आपको जो शांति मिलेगी उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है.......!!!.