About Me

My photo
...आपको मेरा नमस्कार...!! मुझे कौन जानता है.......? यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाए इस के कि मैं किसे जानता हूँ ? मै..सकलानी....!!!..आनंद सकलानी....!!!! पहाड़ो की पैदाइश, हिंदुस्तान के चार मशहूर शहरों शिक्षा के नाम पर टाइमपास करने के बाद अब कुछ वर्षों से अच्छी कंपनी का लापरवाह कर्मचारी ..! राजनीति करना चाहता था, पर मेरे आदर्श और सिद्धांत मुझे सबसे मूल्यवान लगते हैं, और मैं इनके साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता हूँ, गलत को सही दिशा का भान कराना मेरी मजबूरी है , वह बात और है कि मानने वाला उसको माने या न माने...!!!..खैर दोस्तों....!! जिंदगी का क्या है.....?सपने तो दिखाती है मगर ...बहुत गरीब होती है....!!

Wednesday, February 23, 2011

बड़ी
गहरी उदासी है
कभी
मिलने चले आओ
हमारी
रूह प्यासी है
कभी
मिलने चले आओ ....!!!!

लबों पर
आखिरी दम है
कभी
मिलने चले आओ
हमें
मोहलत जरा कम है
कभी
मिलने चले आओ....!!!

हमारी
साँस थोड़े है
कभी
मिलने चले आओ
लो
हमने हाथ जोड़े हैं
कभी
मिलने चले आओ...!!!!

3 comments:

  1. haa badi gahri udasii hai kabhi milne chale aao...nice poem.....

    ReplyDelete
  2. great poem bro..keep it up..:)))

    ReplyDelete