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...आपको मेरा नमस्कार...!! मुझे कौन जानता है.......? यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाए इस के कि मैं किसे जानता हूँ ? मै..सकलानी....!!!..आनंद सकलानी....!!!! पहाड़ो की पैदाइश, हिंदुस्तान के चार मशहूर शहरों शिक्षा के नाम पर टाइमपास करने के बाद अब कुछ वर्षों से अच्छी कंपनी का लापरवाह कर्मचारी ..! राजनीति करना चाहता था, पर मेरे आदर्श और सिद्धांत मुझे सबसे मूल्यवान लगते हैं, और मैं इनके साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता हूँ, गलत को सही दिशा का भान कराना मेरी मजबूरी है , वह बात और है कि मानने वाला उसको माने या न माने...!!!..खैर दोस्तों....!! जिंदगी का क्या है.....?सपने तो दिखाती है मगर ...बहुत गरीब होती है....!!

Tuesday, October 11, 2011

खुद का तिरस्कार...!!!

आज ३ दिन हो गए...!!!
माँ ने शायद ३ मिनट  में भुला दिया होगा ..मगर ये वाकया मुझे अब  तक वैसे ही सालता आ रहा है...जैसा  कि तीन दिन पहले...!!!..
......मुझे मेरे बदतमीज और जाने क्या क्या होने का अहसास अक्सर होता है...मगर इस बार पापी और झूठा अहंकारी भी समझ आया ..!!!
          हुआ यूँ कि मेरा स्वास्थय   कुछ ख़राब चल रहा था...काम  आपाधापी को छोड़ कर मै कुछ जरुरी काम लेके जल्दी घर आया .तस्सली से करने के लिए...करीब पौने घंटे का काम निपटा लिया ..तो अँधेरा सा हो गया. माँ जो की करीब ७२ साल की हैं उठी ,शायद ...माँ  को बाथरूम जाना था ..स्विच बोर्ड एक ही है ..उन्होंने कापते हाथो से  बटन दबाया...वो बटन मेरे पी०सी के कनेक्शन का था..बस कंप्यूटर बंद हो गया...!!
   एक दो बार पहले ऐसा हुआ है...पर इस बार मैं झल्ला सा गया ..शायद दौरा पड़ा पागल पन का ..मैंने माँ को कुछ नहीं कहा .बस .टेबल से सेल फोन उठाया और बहुत ताकत से जमीन पे पटक दिया...जैसे माँ को दिखाया क़ि... हे माँ देख तेरा बेटा इतना ताकतवर हो गया  अब और तुम कुछ नि कर पाओगी "..कितना घटियापन था...!!! घृणा सी आ जाती है वो सोच के....खुद  पे....
..खैर दोस्तों..
....मैंने माँ को अवाक् देखा...उनकी  डब डबाई आँखों में डर सा देखा ..शायद पहली बार..!!!.अगले ही पल माँ संभल गई...बैठ कर फ़ोन  के बिखरे टुकड़े समेटते हुए  बदबुदाई " म्यरा... इन्नी गुस्सा रालू  त जिंदगी कनकै काटल्य़ा" (मेरे बेटे ऐसे ही गुस्सा करते रहे  तो जीवन कैसे काटोगे..?..)

..मुझे ममता का वास्ता  दोस्तों...
उस  वक्त मन  हुआ क़ि माँ क़ि बाँहों में छुप जाऊं ..रो रो के लिपट जाऊं..और कहूं क़ि माँ आप  कहीं से  भी कमजोर नहीं  हैं.. समझाऊँ कि आपने कुछ भी तो  गलत नहीं किया ..गलती तो मेरी  है मैंने बिजली रोकने वाली मशीन (यु० पी० एस०) नहीं लगाया ...फाईल सेव नहीं की...
  खैर दोस्तों ...पर्स चेक किया बहार निकला...नया फोन जो लेना था..सारा डिस्प्ले और कैबिनेट टूट चुकी थी .कि खास दोस्त का फोन आया ...मैंने उसकी बात सुने  बगैर अपनी बात एक  सांस में कह दी...
.....मगर दोस्तों उसका जो जबाब था वो शायद मुझे आपेक्षित  ही  नहीं था...उसका जबाब सुन के मै सन्न  रह गया ..कहा..कि ."एक बार के लिए हम सोचें कि हमसे  ऐसी भूल हो गयी ..मगर हम आप  से इस तरह की हरकत की कल्पना भी नहीं कर सकते..."
पता है इस का मतलब क्या था...फेसबुक पर या ब्लॉग पर ..मनमोहक पोस्ट लिखने वाला या अच्छी बाते करने वाला आनंद ऐसा नहीं कर सकता...!!
..............पर पीड़ा देता है ये सब...!!!.अगर मैं घर में अच्छा नहीं तो बहार अच्छा कैसे हो सकता हूँ...??? इतना दिखावा क्यूँ है मुझे में...?
सवाल जहा का तहां है...
...मै खुद   का तिरस्कार झेल रहा हूँ...माँ कब की चैन से  सो चुकी हैं...पास में... मै ..सर पे ग्लानि का बोझ लिए जाग  रहा हूँ... माँ मुझे माफ़ कर देना ...क्योंकि दर्द में और  भूखा प्यासा नादान बालक भूख  लगने पे ही तुम्हे याद करता है

Wednesday, September 28, 2011

.शुभकामनायें...!!!

आपको मेरा नमस्कार ...!! 
सथियों नव रात्रे आ गए है .शुभकामनायें...!!!...आपकी दुआओं को एक खास रूप गढ़वाली कविता में दिया है...जगत जननी पापों का हरण करके आपकी - मेरी दुआओं में तासीर दे...!!
 
मेरी सुरकंडा माँ...!!!
मै सणी  आफु सी प्रेम करणु सिखो...

हे राज राजेश्वरी ...!!             
मेरी आंख्युं म आँसूं बगई दे...
जैका बगदा उमाल मा 
मै डूबी की मरी जौं....!!! 

मेरी चन्द्रबदनी माँ .
मै सणी  प्रेम  की कई 
नदी म बगई दी..
ज्वींका छाला लगी की मै 
आफु   सणी भूली सकौं ..!!! 

हे धारी माँ ...!!
मैमू  ऊ उकताट 
अर यनी धंगतौल पैदा कर 
कि ढुन्गों  कि छाती चीरी की 
मै तेरा चरणु म 
अपडू मस्तक... रगडी द्यों...!!

 हे माँ कुंजापूरी ...!!!
नवमी का नवराता दयोलू..
अर दशमी कु पैतू...
बस मेरा हाथु की लकीरू सी
मैकू कभी हारण ना देई....!!!

हे नैना देवी माँ....!!!
कुछ यनु ...
जरुर करी देई..
कि सुपिन्या सच ह्व़े  जावून...
यूँ अंधियारों म 
कुछ बाटा  मिली जावून...
ये ब़िरणयां  बटोही ...तै 
अपड़ी आन्खुं म संभाली रखि.....!!! 



कैलाश म बसी नंदा माँ.....!!!
 यु जनम 
और औंदी मौत...
सब्बी तेरु छ...
मैमु मेरी नादानी कु ..

"कभी हिसाब किताब न  सुणाई देई ...!!!

माँ शेरा वाली ..आपकी झोली आश्चर्यजनक खुशियों से भर दे...!!
शुभ रात्रि...!!!
...***धन्यवाद्***...

Sunday, August 7, 2011

फेसबुक में आज...!!!

आपको मेरा नमस्कार..!!!
साथियों... मित्रता दिवस की रिमझिम बारिश में डूबी हुई इस शाम को आपके पहलू में बैठ के एक खास बात कहनी है...!!!
..मित्रो आज फेस बुक के मंच पे मैंने हजार मित्रो का आंकड़ा पार किया....ये कोई बड़ी उपलब्धि नहीं...बचकाना सवाल है....मगर  मित्रो जिसने भी मित्रता का हाथ बढाया...मुस्कुरा के स्वागत किया...कुछ विभूतियों  को आमंत्रतित किया....!!!..जो अनुरोध में हैं ...उनके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ..कुछ विशेष कारण ..या तो उनकी  भेषभूषा या  कुछ भी और कारण....
खैर जो भी हो.....!!
मित्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये...अगर मेरे सच्चे मित्र हैं...तो एक संकल्प जरुर लीजिये ..इस  पवित्र   दिवस की समाप्ति पर....दुबारा न लौट आने वाले रात्रि के इस पहर में....!!!
..कृपया वचन  लें---

१ ...वक्त के साथ जिस दिन हम अपने माता पिता को उनके क्रिया कलाप से वृद्ध महसूस करे तो सब्र रखें....और उन्हें समझने की कोशिश करे....!!!
२ .....जब वे कोई बात भूल जाये ..तो उन पर गुस्सा न  करें.. और अपना बचपन याद  करने की कोशिश करें...!!!
 ३ ...उन्हें चलने में दिक्कत हो तो ...सहारा बने ...याद रखे हमें चलना सीखते वक्त उनकी सांस कई बार अटकी थी ..हमें डगमगाता देख के.....!!!
४ ..अगर  उनका स्वास्थ्य ख़राब हो ..तो अपना पैसा दिल खोल कर उनपे ये सोच के खर्च करना ..कि हमारी  खुशियों के लिए  उन्होंने अपनी ख्वाहिशें कुर्बान की हैं...अपने सुख का गला घोंटा है...!!!

मित्र  बनाना तो आसन है दोस्तों...!!!
अगर....

किसी को मित्र बनाना ही है तो अपने आत्मविश्वास को अपना दोस्त बनाईए...... आत्मविश्वास
तरक्की की सीढी तो क्या ये आपको ऐवरेस्ट की पहाडियो तक को भी पार करवा सकता है ….
....है ना ….???
 
हैप्पी फ्रैडंशिप डे..!!!

शुभ रात्रि  ,शब्बा-खैर...!!!
...***धन्यवाद***... 

Thursday, July 7, 2011

इंसान होने का सबूत दिखाइए

.
..........
साथियों आज आफिस से भारी मन से लौटा मै....!!! एक जानी पहचानी उदासी थी....उस पर भरे ट्रेफिक के  बीच दर्शन लाल चौक  पर  एक ६-७ साल का बच्चा ..टिस्सू पेपर खरीदने   की जिद करने लगा...बारिश थी शीशा नहीं खोल पाया मै...पर उसके बदबुदाते हुए होंठ और आँखों में झलकती हुई..बेबसी को...समझते हुए भी गाड़ी बढ़ा  दी....!!
..१०० मीटर आगे चलकर ..मन हुआ... खरीद लूँ....मगर ऐसा नि कर पाया मै..हाँ सोचों ने दामन से मेरी आँखों में कुछ तस्वीरे उकेर दी....!!!
....क्या मैं या कोई भी इन्सान ...रोज एक पाकेट खरीद के ..ये सब बेबसी /गरीबी मिटा सकता है...?..बिलकुल नहीं...बेचने वाले .तो शो रूम में भी बैठे है...आदमी कोम्फेर्ट होके...वहां से खरीद सकता है....!!!
...कुल मिला के लब्बोलुआब ये है...कि..हम सोच बैठे हैं.,..कि हम कुछ बदल नहीं सकते...!! मगर ऐसा नहीं है...हम अपने घर में बैठ के भी...दुनिया बदल सकते है.....हम हमेशा ये सोचते हैं..कि नई जनरेशन ..बिगड़ रही है..बदतमीज हो रही है ....
..उनके आगे उदहारण कौन लोग है....?.जो भी हो...संस्कारों के संवाहक हम लोग ही है...हम जो उन्हें देते है ..वो सूद-ब्याज सहित...हमें लौटाते है....!!
आप चाहे तो ....बस आगे कि कुछ लाइन ..बेमन से ही सही ..पढ़ लीजिये....!!
........बहुत बच्चे...वक्त से पहले...अपने पापा के जूते पहन लेते हैं....उन्हें "स्कूल शूज" के लिए तरसाइए...!!!.उन्हें ललचाइये कि ये  "स्कूल शूज" आप के पैरो में जादा अच्छे लगते हैं...अपने पास पड़ोस  या किसी सामाजिक संस्था  जो इस तरह के  काम में लगी हो...प्रोत्साहित करिए...!!..किसी बच्चे की सरकारी स्कूल फीस .भरने का जिम्मा  भी ले लेंगे....तो समझ लीजिये की आपने एक अच्छा इन्सान बना लिया दुनिया में...क्यूँकि जिंदगी भर के लिए उसके दिल में अच्छाई के बीज बो दिए आपने...!!
............भीख नहीं ...सही हाथो.. में ...सही काम के लिए दान दीजिये....अपने इंसान होने का सबूत दिखाइए...अगर कही ईश्वर है तो उस को जबाब देने का माद्दा रखिये.....!!!और हम में से कुछेक इन्सान भी ये कर बैठे..तो समझिये...अपने भविष्य को संवार दिया हमने...!!
.....
.........आपको जो शांति मिलेगी उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है.......!!!.

Sunday, June 12, 2011

दहेज़ ...दोष किसका... ?


 साथियों को मेरा नमस्कार....!!! 
स्पेशल मुस्कान  खासकर मेरी हमउमर महिला दोस्तों को...जो उन राहों से गुजर  रहीं है..जिनमे मेरे भी कदम ...संभाले नि संभल रहे....कुछ सवाल बचपन से दिमाग में अटकते है...अब दायरा  बढ़ गया  तो दिल ने कहा  आपसे बाँट लू....!!!
कुछ शिकायते है....बुरी लगेंगी तो अपनी राय दे....पर मुझे आप  से शिकायत है..उदाहरण भी दूंगा ..वरना आप में कई लोग ...इस उम्र में लडको से चिढ  जाते है.....(मुझे पता  है.......हम्म्म्ममम्म...) 
...तो अथ...श्री.. कथा शुरू होती है मेरे गाँव से......मै ५ भाई बहिनों के परिवार में सबसे छोटा....कुछ जिद्दी, मुहफट.....हां माँ को बड़ी दिक्कत कर देता था...बाकी सब से तो पिट जाता था...
.......अब दहेज़ का मुद्दा चलता है तो बहुत छोटा था...जब बड़ी दी को..इस बात पे रोते देखा कि... बाकी सामान तो आया ...कलर टी ० वी ० कहाँ है....?
....मंझली  दीदी इस बात पे रोई थी कि लड़का दुकानदार है...पता नहीं बिजनेस चलेगा कि नहीं....???..इसलिए माल (कैश ) में डील होगी...!!
......और छोटी तो दीदी सबसे स्मार्ट निकली..उसने   इतिहास से सबक लेकर ....बाकायदा एक खूबसूरत लिस्ट तैयार क़ी...बाकायदा ब्रांड नाम के साथ....!!
..खैर जो भी हो ...वो लोग भरे पूरे  सयुंक्त परिवारों में है....उनके ससुराल में जाता हूँ..तो गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है..अच्छी खासी आवभगत होती है..मन में माँ के संस्कारों को सलाम करता हुआ .शान से लौट जाता हूँ..!!
..मेरे युवा मित्रो....दहेज़ है क्या....? 
...प्राचीन भारत में माँ बाप ने आपसी समझोतों से नवदम्पति के नव जीवन निर्माण के लिए कुछ आवश्यक सामान का प्रबंध किया होगा...जो वर्तमान में दहेज़ का भयंकर रूप ले चुका है....हत्याए ,तलाक...विवाद ...और जाने कितने दुश्परिमाण को जन्म देता रहा है ये दहेज़....
..पर मेरे लिए अब  हैरान कर देने वाली बात ये है...अभी इस पर चर्चा करने को तो हजारो मिल जायेंगे...थू- थू करेंगे... लेकिन हिंदुस्तान के करीब २१-२२ प्रदेश घुमने के बाद भी मुझे ..खासकर लड़कियों का कोई इतना बड़ा या मजबूत संगठन नजर क्यूँ नहीं आया....जो इस रिवाज कई पुरजोर खिलाफत करे....???
..क्या इस बात को लेकर कोई असुरखा क़ी भावना  है...?? ..सरकार ने इस पर बहुत कानून और एक्ट तो बना दिए...लेकिन उनको अमल में कौन लायेगा...? 
..नफरतों से भरी ये रस्म शायद कब क़ी ख़तम हो जाती जो हमारी कुछ युवा मित्र..इसको सोचती....उनकी बात इसलिए कर रहा हूँ..क्यूंकि सबसे जादा वो ही इस इस विषग्नि  की शिकार होती है ..
..कई लोग कहते है...हिंदुस्तान  की महिलाये अपनी परेशानियों की जिम्मेदार खुद है... अबला सुनना उन्हें अच्छा लगता है..
.....और एक सच  तो मुझे भी पता है... कि चाहे लड़का हो या लड़की ..सास ससुर हो या माँ बाप....
कि यहाँ पे ताली दोनों हाथ से बज रही है.... जब तक  लड़की सपनो के राजकुमार को पैदल या साईकिल के बजाय  कार पर आने के ख्वाब देखेगी ..और लड़की के माँ बाप ..लड़के के बंगले और कार पे नजर रखेंगे.....तब तक ...तब तक लड़के के घर वाले..लड़की के घर कि दौलत पे नजर गडाते रहेंगे.....यही सच है...और बरक़रार रहेगा....
......ऊपर अपने घर का उदहारण  दिया है.... लडकियाँ दहेज़ से लड़ना ही नहीं चाह रही हैं ....सुविधा कि चाहत और सपनो ने ...उनको  संघर्ष के रास्तों से दूर कर दिया है....आँखे खुली है..पर चुन्नी   लगा रखी है....सपनो ने उन्हें...कमजोर ही किया है...

....याद रखना....!!!


Saturday, May 28, 2011

ॐ आदित्याय नमः:...!!!

आपको मेरा नमस्कार...!!!...
मित्रो आज रविवार है..सभी का छुट्टी का दिन...जीन में दुःख क्लेश संताप, प्रगति की मारामारी के बीच थोडा हल्की फुल्की सुबह...!!!..इन्ही अवसादो और सन्तापो के बीच आपका जीवन सरल ,शांत और खुशनुमा बनाने के लिए...मेरे कुल पुरोहित के दिए हुए कुछ अचूक नुख्से....
..आप जानते है पृथ्वी पर साक्षात् देव कौन है...??? आज रविवार है सूर्य भगवान का दिन..!!!जो व्यक्ति सूर्यदेव की उपासना करता है उन्हें भगवान का अनुग्रह शीघ्र प्राप्त होता है..और सूर्यदेव का अनुग्रह प्राप्त होते ही अनायास ही जन्म जन्मान्तर की दरिद्रता का अंत हो जाता है  प्राकृतिक  रूप से ही देह स्वस्थ होकर देहसुख भी प्राप्त होता है सूर्यदेव की उपासना करने से प्रभाव शीग्र दृष्टि गोचर  होते है.....रोग शोक दुःख दरिद्र का अंत हो जाता है...!!
...तो साथियों  रविवार को सूर्योदय से पहले उठकर नहाधोकर तांबे के लोटे में जल भर के उदय हो रहे सूर्य को अर्ध्य की भांति जल प्रदान करें...
यह मंत्र  का उच्चारण करें... 
"एहि सूर्यम सहास्राशो तेजोराशि जगत्पते 
अनुकम्पय माँ भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर.."
ॐ सूर्याय नमः | अर्ध्य समर्पयामि...!!
..सूर्यदेव के हजारो मंत्र है...आगे भी व्याख्या करूँगा ..किन्तु इस प्रचलित  लघु एवं अचूक मंत्र का  प्रभाव इतना है कि आपके माथे से गरम भाप निकल कर वातावरण में विलीन हो रही है...यह प्रभाव पहली बार से ही जलार्पण करने से होने लगता है..आप खुद महसूस करिएगा...!!!
आगे जो मंत्र का व्याख्यान कर रहा हूँ....अद्वितीय है ..मैंने खुद भी आजमाया है ग्रहों के दोष ..नेत्ररोग, त्वचा विकार रक्त विकार .स्त्री पुरुष के समस्त विकार,संतानहीनता ,दरिद्रता ,  भाग्योदय के लिए रामबाण है .आपका तेज...सूर्य के सामान चमकेगा ..त्वरित प्रभाव ..व इसका असर स्वयं देखें......



"आदि देवं नमस्तुभ्यं प्रसीदम मम भास्कर 
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकरम नमस्तुते ...१ 
सप्ताश्व  रथ मारूढ़ं प्रचंडं कश्यपात्मजम  
श्वेत पदम धरं  देवं तं सूर्यम प्रणाम्यहम ...२
लोहितं रथ मारूढ़ं सर्वलोक पितामहम 
महापापम हरम देवं तं सूर्यम  प्रणाम्यहम...३ 
त्रेगुणं च महाशुरं ब्रह्मा विष्णु महेश्वरम 
महापापम हरम देवं तं सूर्यम  प्रणाम्यहम....४
वृहतम तेजम पुन्जम वायुराकाश मेव च
प्रभु सर्वलोकानाम तं सूर्यम  प्रणाम्यहम.....५ 
बन्धुक पुष्प संकाश हार कुंडल भूषितं 
एक चक्रम धरं देव तं सूर्यम  प्रणाम्यहम....6
तं सूर्यम जगत कर्तारं महातेज प्रदीपनम
महापापम हरम देवं तं सूर्यम  प्रणाम्यहम. ...७
तं सूर्यम जगतं नाथं ज्ञान विज्ञानं मोक्षदम
महापापम हरम देवं तं सूर्यम  प्रणाम्यहम....८
फल प्राप्ति :
सुर्याष्टकम पठेनित्यं ग्रहपीडा प्रणाशनम
अपुत्रो लभते पुत्रं  दरिद्रो धनवान भवेत ..९
आमिषम धनु पानं च या करोतिर वरदने
सप्त जन्मं भवेदरोगी जन्म जन्म दरिद्रता.. .१०
स्त्री तैलं मधुमासा नित्यसत्यजेत्तु रविर्दने
न व्याधि शोक दारिद्र्यं सूर्यलोक सगच्छति ..११.

...आप सभी के लिए मंगल कामना....!!!
धन्यवाद्...!!!


  


















Sunday, May 8, 2011

ये कौन है .....???.....

मातृ दिवस की ....
बहुत बड़ी बड़ी बधाईयाँ सभी दीवारों पे.... आज शोभा बढ़ा रही हैं......बहुत अच्छा है....मातृ शक्ति को पूजिए ...अभिवादन कीजिये....!!
लेकिन मेरे भाई आपसे  ..और समाज के ठेकेदारों से एक विनती है ..इन आंकड़ों को देखिये और  खुद से पूछिए माँ है कौन...? वो जिसने हमें जन्म दिया ...?? या वो जो सबको जनम देती है...?

सब रंगीन पोस्टर लगा के जय हो ....और गुणगान कर रहे हैं....लेकिन यह भी सोचा जाये कि माँ ने अपने निर्माण में कितनी वेदना उठाती है.....आपका हमारा निर्माण तो वो मुस्कुराते हुए करा करती है..कोख को सहला के ..मुस्कुराती है....
 वो शक्ति, सहिष्णुता, सहृदयता, सरलता, सर्वग्राह्यता, सुन्दरता, सेवापरायनता, सचेतना, शुचि, शुभंकरी, शोभा है संसार की .......
पर......... २१वी सदी में भी माँ और माँ की बुनियाद  से जुडे कुछ कटु सत्य...
* हर २४  मिनट में एक लड़की के साथ छेड़-छाड़.....!!!!
* हर ३२  मिनट में किसी महिला बलात्कार की शिकार......!!!!
* हर ४1 मिनट में घर, कार्यालय, विद्यालय या अन्य किसी स्थान पर यौन-उत्पीडन.....!!!
* हर ९0 मिनट पर दहेज़ के लिए जला दी जाती है या मार दी जाती है....!!!
* हर ३ महिला में से १ महिला आज भी निरक्षर....!!!
* हर १० महिला में से कार्य सिर्फ ३ महिला को .....!!!
* विश्व स्तर पर बेरोजगारी की दर ६.९ जबकि पुरुषो की ४.३ ....!!!
* कन्या भ्रूण हत्या का प्रतिशत बढ़ते जा रहा है...!!!!


ये
 कौन है .....???.....इसमें किसी को माँ नहीं दिखती....??????

....उसकी उड़ान के पंख हजार,....उसकी मुट्ठी में आसमान,...... उस पर पर गर्व करने के कई अवसर...
.......निराशाओ के बावजूद एक आशा ..(जी  हाँ ......""आशा,""............ शब्द ही स्र्त्रिलिंग है...)
उसके  हौसले.. !!!!!
मातृ  दिवस की बधाइयाँ
...धन्यवाद्....!!!


....कौन पूछेगा हवाओं से सन्नाटों का सबब ?
शहर तो यू हीं हर रोज मरा करते हैं ,
कभी दीवारों मैं कान लगा कर तो सुनो
 कलम के हाथ भी स्याही से डरा करते हैं......!!!!







Thursday, May 5, 2011

महिमा: माता मंगल चण्डिके की

..साथियों मेरे जीवन  पे मेरे कुल पुरोहित श्री महादेव बहुगुणा जी
का गहरा असर है अब वे अस्वस्थ है..उनसे बहुत ज्ञान प्राप्त किया है.. ..दुनिया में बहुत लोग दुखी हैं..मन्त्रों में बड़ी शक्ति है अगर शुद्ध भाव आस्था एवं एकाग्रचित होकर मंत्रो चारण तो परम सफलता मिलती है बस धैर्य पूर्वक इस मन को जीवन को अनुष्ठान /उत्सव बना कर  किया जाये तो . बस माता का ध्यान जरुर करें ....//प्रणाम\\ मेरे परम गुरु ..... उन्ही के दिए ज्ञान के कुछ अंश .....
ध्यान: माता मंगल चण्डिके सुस्थिर यौवना है..ये सम्पूर्ण रूप गुण से मनो हरिणी हैं श्वेत चप्म्पा
के सामान इनका गौर वर्ण है तथा करोडो चंद्रमाओं के समान इनकी मनोहर कान्ति है ये अग्नि शुद्ध दिव्या वस्त्र धारण किये हुए रत्न अभूशानो से विभूषित  है मल्लिका पुष्पों से अलंकृत केश धारण करती हैं ..सुन्दर दन्त पंक्ति कमल के समान शोभाय मान  मुख वाली मंगल चंडिका के प्रसन्न चेहरे पर मंद मुस्कान की छटा छाई हुई है ...इनके दोनों नेत्र नील कमल के समान मनोहर हैं...सबका भरण पोषण करनेवाली ये देवी सबकुछ प्रदान करने में सर्वदा सक्षम हैं ..संसार रुपी घोर समुद्र में डूब रहे व्यक्तियों को उबरने के लिए जगदम्बा जहाज का काम  करती  हैं...!!

*** मंगल चंडिका के निम्न स्तोत्र के पाठ से करुणा मयी माँ शीघ्र प्रसन्न होती है "

"**रक्ष -रक्ष जगन्मातर्देवी मंगल चण्डिके , 
हरिके विपदा राशे हर्ष मंगल करिके
हर्ष मंगल दक्षे हर्ष मंगल चण्डिके,
शुभे  मंगल दक्षे च शुभ मंगल चण्डिके
मंगल मंगलार्हे च सर्व मंगल मांगल्ये ,
सताम मंगल दे देवी सर्वेषाम मंगलालये
पूज्य मंगलवारे च मंग्लाभीष्ट दैवते,
पूज्य मंगल भूपस्य मनु वंशस्य सततम
मंग्लाधिष्ठातृ देवि मंग्लानाम च मंगले , 
संसारे मंगला धारे मोक्ष मंगल  दायनी 
सारे च मंगला धारे पारे च सर्वकर्मणाम,
प्रति मंगल वारे च पूज्य च मंगल प्रदे ...***!!

भावार्थ : जगन्माता भगवती मंगल चण्डिके तुम सम्पूर्ण विपत्तियों का विध्वंस 
करने वाली हो ..एवं हर्ष तथा  मंगल प्रदान करने को हमेशा प्रस्तुत रहती हो...मेरी रक्षा करो ...रक्षा करो...खुले हाथ हर्ष एवं मंगल देने वाली हर्ष पड़ा मंगल चण्डिके तुम शुभा, मंगला दक्षा   , शुभ मंगल चण्डिका, मंगला ,मंग्लार्हा तथा सर्व मंगला कहलाती हो ,अच्छे लोगों का मंगल करना तुम्हारा स्वाभाविक गुण है ,तुम सबके लिए मंगल का आश्रय हो ..देवी तुम मंगल ग्रह की इष्ट देवी हो ...मंगलवार के दिन तुम्हारी पूजा होती है ...मनुवंश में उत्पन्न राजा मंगल की तुम पूजनीय देवी हो  ...मंगल की अधिष्ठात्री देवी तुम मंगलो के लिए भी मंगल हो ..जगत के समस्त मंगल तुम पर आश्रित हैं तुम सबको मोक्षमयी मंगल प्रदान करती हो ..मंगल वार के दिन सुपूजित होने पर मंगल मय सुख प्रदान करने वाली देवी .तुम संसार की सारभूत मंगल धारा तथा समस्त  कर्मो से परे हो......!!!

लाभ : मांगलिक ग्रह के समस्त दोष शांत होते हैं
    २. मंगली के लिए राम बाण  एवं प्रचंड रूप से लाभदायक है....
    ३.मंगलवार के दिन २१ बार पाठ करें ,
    ४. मंगलवार को नमक न  खाए
    5. रोटी और गुड लाल गाय को खिलाएं 






Monday, April 11, 2011

कि आप क्या हो....!!!


द्रोणनगरी... देहरादून....!!
यहाँ के दो प्रमुख अखबारों में पिछले हफ्ते एक खबर बहुत उछलती रही....अलग अलग शीर्षक मिलते रहे...!!!
..चलिए हम खुलासा  कर देते हैं ..
ये पंकज जी हैं....बहुत सीधे और स्पष्ट वादी इंसान...!! जब पहली बार मैंने इनके बारे में सुना ..तो लोगो की राय थी की इनकी दिमागी हालत स्थिर नहीं है...ये तेज तर्रार दुनिया सीधे इन्सान को पागल बेवकूफ समझती है...!!
आज मुझे पक्का हो गया...!!...और हाँ ..पंकज जी देहरादून  विधानसभा ...से काफी आगे ..नवादा ..ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं...!!
.....हुआ यूँ क़ि पंकज जी कभी देहरादून शहर की सडको पे   विक्रम..(ऑटो रिक्शा टाइप वाहन/थोडा बड़ा ) चलाया करते थे..इश्वर के दिए हुए टैलेंट के हिसाब से उनका व्यवसाय ठीक ठाक था...मगर सितारे कभी कुछ और कहानी लिख देते हैं...उनका छोटा भाई ..बुद्धिमान चतुर था तो .कम्पूटर से सम्बंधित सर्विस में था ...घर में ही क्रयविक्रय व साइबर कैफे चलाता था...कुदरत के कहर से ..उनकी असमय मृत्यु हो गई..अब पंकज भाई क्या करें...???
भाड़े की गाड़ी चलाने से अच्छा ..घर का कम संभाल लो ...लोगों ने सलाह दी....!! डरते हुए ही सही ..पंकज जी ने दुकान पे बैठना शुरू कर दिया.....!! काम करना था ..तो कंप्यूटर सीखना भी शुरू हो गया ..और लड़के लड़कियों को देखते हुए चैटिंग   भी सीख गए....!!!
.
समाज जब किसी इंसान को उचित मूल्य नहीं दे पाता तो भगवान उसकी  साफगोई की कीमत लगाते हैं..आज तक मेरा मानना यही रहा है...और यही उदाहरण मुझे देखने को मिला ..!!!
..खैर इस नेट युग में पंकज जी की दोस्ती U S A  के नौर्थ कैरोलिना शहर की डैनी से हुयी ... पंकज जी के अनुसार उसका पहला सवाल ये था की "क्या आपको कोबरा पकड़ना आता है?"..भारतियों को सपेरो का देश समझने वाली विदेशी धरतिया शायद यही पहचान देती हैं........

खैर छोडिये.....!!

..मामला ..विशुद्ध प्रेम का  हो गया ..डैनी ..भारत देखना चाहती थी...उसने हिंदी भी सीखी ... उसने पंकज जी को बुलाना चाहा..पंकज जी ने असमर्थता जता दी...तो सारी व्यवस्था बनाकर सपने सजाकर डैनी हिन्दुस्तानी साडी पहनने चली आयी...!!

डैनी ने सबसे पहले अपने लिए ..तकरीबन ६५ लाख का घर खरीदा ...शादी की व्यवस्थाएं बनाई ..और हिन्दुस्तानी रीती रिवाज से शादी के पवित्र बंधन में बंध गई.....ये बात तकरीबन १३ दिन पुरानी है.....!!
.......दोस्तों ये आम बात लगती है...और ऐसा अक्सर हो जाता है ...लेकिन जब मैंने पंकज जी से कुछ बात की (वे मेरे मित्र के मित्र हैं ) उनकी रिकार्डिंग भी है मेरे सेल में ..और ये आलेख भी मैं उन्हें पूछ के ही लिख रहा हूँ)
....उन्होंने  मुझसे जो बाते की शायद किसी भी इंसान का दिल जीत लेंगी......बस एक लाइन ही लिखता हूँ...
उन्होंने कहा की अगर कोई तुम्हे नेट पे ..फेक लगे ...और तुम उसे पूछना चाहो ..तो पहले खुद से जरुर पूछना ... कि आप क्या हो....??????
बहरहाल दोस्तों..पंकज जी ..से सिर्फ १५ मिनट बात हुई ....डैनी कुछ दिनों के लिए अमरीका गई हैं...शायद पंकज जी के वीजा के सिलसिले में.....!!!

...यहाँ पर इस कहानी लिखने का मेरा मकसद ये था कि ...पंकज जी के दोस्त ...कुछ दिन पहले ये बाते बड़ी हैरत से कर रहे थे कि उस पागल की किस्मत देखी ...?  मिडिया कवरेज देखी ..? भद्दे शब्द...बेतुकी बाते......
 जले भुने शब्द......!!! ..क्या हमारी सोचह इतनी घटिया हो गई है...? दुनिया के अपराधों ने हमारी सोच को भी छीन लिया ...?...
 जो भी हो... जैसे भी हो...मेरे पास तो इस शुद्ध ह्रदय वाले ..शरीफ इंसान के लिए सिर्फ दुआए हैं....प्यार अमर रहे ..मोहब्बत जिन्दा रहे.....
जोड़ी सलामत रहे.....






..खुश रहो ....पंकज ...डैनी.......!!!शादी मुबारक हो....!!!



Monday, April 4, 2011

रहम की पहली किस्त

..मुझे मैसूर ..बंगलोर (कर्नाटक)आये हुए सिर्फ  एक हफ्ता गुजरा था...सी० एफ़० टी ० आर० आइ० के हास्टल में मेरे कई उधोगपति मित्र बन गए थे..उनमे सी रंगराजन जो "सलेम "तमिलनाडु के थे  और लायन नामक संस्था के  जिला अध्यक्ष भी थे .रविवार की सुबह सुबह बोले चलो आपको तमिल फिल्म दिखाते हैं...हम दोनों के बीच में भाषा को लेकर बड़ा  असमंजस था...उन्हें इंग्लिश बिलकुल भी नहीं आती थी..मेरी भी फ्लूएंसी नहीं थी ..बस हम इशारो में बाते करते ..और एक दुसरे  की बात समझ के  बहुत खुस होते...!!!
...बहरहाल हम  फिल्म गए ..मुझे देख देख के कहानी समझ आ गयी....मगर ये क्या ..हुआ ? रंगराजन ने फिल्म के दौरान बहुत शराब पी ली थी...वो लगभग कुर्सियों पे लुढ़क गए...मैं फिल्म के बाद उन्हें जैसे तैसे सम्भाल के बाहर ले आया...मगर उनका शरीर भारी था मुझसे बिलकुल संभल  नहीं पाया...बडबडाते हुए वो मुझे अकेले हॉस्टल जाने को कह रहे थे..मुझे कुछ भी मालूम नहीं था...रात के बारह से जादा बज गए होंगे..सुनसान सड़क पे हम पैदल चले जा रहे थे...अचानक एक लाज  देख के वो रुक गए और गिरते पड़ते वह चले गए...उन्हें वहा की भाषा का पूरा ज्ञान था  उन्होंने रूम लिया और  मुझे भी सोने को कह के खराटे लेने लगे...!! 
मुझे यहाँ नहीं रुकना था.. और मैं पछता रहा था क़ि मैं उनके साथ आया क्यूँ ..? और भी बड़ी बात ये थी .क़ि उनको सँभालते हुए मेरा पर्स  कही गिर गया था... उसमे करीब ३-४ हजार रहे होंगे... फिर भी  मेरा मन कॉलेज जाने को हुआ...मैं बिना कुछ सोचे ..बाहर आ गया..मुझे पहाड़ो पे बीसों किलोमीटर पैदल चलने क़ि आदत थी...!!
...विधि क़ी विडीम्ब्ना थी मित्रो...!! मै इस शहर से अनजान उल्टी दिशा में चला जा रहा था...बारिश शुरू हो चुकी  थी और .चन्दन के पेड़ों क़ी खूसबू मेरे नथुनों में महक रही थी..इसी तरह १०-१२ किलोमीटर चलने के बाद 
मुझे लगा क़ी मै गलत दिशा में आ गया हूँ... शहर क़ी सीमा पर आ चुका था मैं. ...
अब क्या हो सकता है...?मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था...भूख भी लग रही थी...प्यास भी और थकन भी...!!..मैंने पास में .एक दुकान क़ी शेड देखी...और वहा जाके उसके नीचे  दीवार के सहारे बैठ गया...जुलाई क़ी उमस में मुझे ठंडी ठंडी हवा ने नींद के आगोश में भेज दिया...!!.सुबह करीब ५ बजे मेरी आँख खुली ..एक दम से ख्याल आया मेरे पास तो हॉस्टल में भी पैसा नहीं है...? ए० टी ०एम ० भी गया ..खाना कपडा तो हॉस्टल से मिल ही जायेगा लेकिन घर कैसे फोन करूँ...?मैंने तो घर भी  मना कर रखा था क़ी मैं फोन कर दूंगा आप मत करना...!!
..खैर  भूख से बेहाल होता हुआ मै उठा....!!बारिश और तेज हो गई थी ..सुबह की बात थी स्कूल की गाड़ियों के अलावा इक्का दुक्का ट्रेफिक था बहुत धीरे धीरे मैं  वापस बढ़ रहा था..फिर जाने क्यूँ एक शेड के पास ऐसे ही खड़ा हो गया...!! प्रकृति के खेल निराले हैं मैंने पहाड़ों पे हमेशा रिमझिम वाली बारिश देखी .है .यदा कदा तेज...जब बेमौसम बरसे तो....!!
मगर यहाँ तो बाढ़ सी आ गयी थी सड़क में...!! 
..और दोस्तों...ये बाढ़ कही कहर ढाती है कही बेघर करती है ...कही सुनामी है ..कही राजस्थान..तो कही उडीसा....!!! 

मुझे तो ये छोटी बाढ़ वरदान बन के आयी.....तेज बहते पानी में ..रबर बैंड  में गुंथे ..कुछ रुपये बहते हुए नजर आये...एक पल के लिए यकीं नि हुआ ..लेकिन भूखे शेर की तरह झपट गया मैं...!! 
बड़ी रकम थी ..सात हजार दो सौ..!! अनजान शहर था ..पोलिश -थाने की कहानिया एक जैसी हैं...ये मैं समझता था... चुपचाप भीगी हुयी पैंट  की जेब में वैसे ही सरका दिए....!रफ़्तार दुगुनी हो गयी थी.........
.............
...क्यूँ की वैसे भी ..मालिक के रहम की ये पहली किस्त थी...!!

Friday, March 18, 2011

खुश रहो ..भावना / सतीश ...!!

भावना .....!!!
भावना  उपाध्याय  ..नाम था....लम्बी ..छरहरी दुबली ...और सुराही जैसी गर्दन....बहुत तेज कदम चलती वो.. चश्मा लगाती थी....!!क्लास  छूटते  ही  सबसे पहले   ट्यूशन वाले सर के  घर के बहार पहुछ जाती  ........ उन दिनों मैं कोल्ड ड्रिंक कंपनी में पार्ट टाइम जॉब करता था तो क्लास में बहुत  कम जाता  था...वो टाइम भी सूट   नहीं था था मुझे...हां एक अछे फ्रेंड की सलाह पे  ट्यूशन लगवा ली...
.......खैर भावना ..थोडा पहले आती तो हाय  हेल्लो हो जाती....जाने हम दोनों की आँखों में क्या था एक दुसरे के लिए ...हम दूर रहके भी एक दुसरे  को बार बार देखते ....मन ही मन कुछ सोचते ....!! मेरा पक्का दोस्त अरविन्द वोहरा  (जाने अब कहा है ?)मेरे  मन से पहले उसके मन की बात जान गया .....उसने बता दिया...देख वो लेक्चर के दौरान .तुझे देखेगी....!!!
...मै डरपोक था....बिलकुल वैसा जैसे हाल में मैंने " रब ने बनाली जोड़ी का शाहरुख़ " को देखा ...चाहते हुए भी भावना से कुछ  नहीं बोल पाता...!
..खैर  साथियों...मामला ऐसे ही चलता  गया ...आगे नि बढा..मुझ पे पढाई और जॉब का दबाब था ..एक नशा था कम उम्र में जादा  और कुछ बड़ा करने का...!!!
..मेरी ये फिस्सडी सोच ...मुझे ..थोडा दर्द दे गई...अरविन्द जो  मेरा हल्का फुल्का  मैस्सेंजेर और पक्का दोस्त हुआ करता था  अपने बर्थडे पार्टी पे  सिर्फ मुझे   पार्टी  दे गया ...!!!
...अरविन्द ने मेरे आगे कोल्डड्रिंक की बोतल  रखी..खुद के नए बीयर की कैन ...और सपाट शब्दों में बोला....
................ देख सकलानी...."मैं जनता हूँ तुझे अभी न मेरी जरुरत है न भावना की ...और शायद तेरे लिए ये ...ठीक भी है...लेकिन मेरे भाई ..तेरी बाते करते करते भावना मुझे पसंद आ गई है....और सच ये है  कि तेरे दिल की आग मेरे दिल जितनी बड़ी नहीं है....!!!! मैं उसे दिल कि गहराइयों से चाहने लगा हूँ...!!!."
..स्पोर्ट में मुझसे आगे...पढाई में मुझसे  तेज...दुनिया को मुझसे पहले समझने वाला ..सुख दुःख में सबका साथी अरविन्द मुझे आज सबसे बड़ा मूर्ख  और बेदर्द नजर आया...!!! गुस्सा और दर्द पी गया ...मै..सिगरेट कांप गई मेरी उँगलियों मै .,...मैं कुछ कह देता मगर  मेरे कापती बांह को जोर से थामा सतीश ने ....वो सब सुन रहा था....जाने मुझे ऐसा लगा कोई संभाल रहा है मुझे.....!!!...थैंक्स सतीश ...!!
......मैंने किसी से कुछ नहीं कहा
भावना को  शायद  अरविन्द ने बता दिया होगा,,,और हमारे इक्जाम भी शुरू हो गए ,,,,लेकिन भावना को भूल पाना मुश्किल हो रहा था...अरविन्द ने मुझे बताया  की भावना का इकरार  हो चुका है उससे ....वो दोनों  डोईवाला से आते थे...अरविन्द के शब्दों में कि हम हमेशा एक बस एक सीट में आते हैं.....मेरी रही सही उम्मीद को ढहा गया .....मैं अपने काम में मशरूफ हो गया,,,,
...वक्त बहुत तेजी से गुजर गया मित्रो...अगले बरस यूनियन  वीक आ गए  मेरे कुछ मित्र मेरी नज्मे  बहुत पसंद करते थे...मुझे घर से पकड़ के कॉलेज ले गए......लगभग  आखिरी   पलों अपना मैंने  नज्म पेश की ...मुझे याद है वो तालियों की गडगडाहट .... मेरा एक अछे कालेज में दाखिला हो गया था और मुझे पता था की मैं दुबारा इस कालेज में शायद ही  किसी कार्यकर्म में  अब भाग ले सकूं...!!
....दोस्तों मैंने लगातार दो नज्म सुनाई..मुझे सब कुछ बीते पल याद आ रहे थे ....कविताये भी लोगों की  प्रतिक्रियाओं  से अपने खूबसूरत होने का भान दे रही थी...!! 
...मैं मंच से उतर कर नीचे पंडाल में आकर  बैठ गया....बामुश्किल ५ मिनट ...मेरे पास २ लडकिया आई ..एक भावना दूसरी जाने कौन...में  अचानक से खड़ा हो गया .....!! आज पहली बार भावना से  जादा खुल के बात हुई थी मेरी...
..." बातों बातों में भावना ने कहा  " आप के जाने के बाद अरविन्द कभी दोस्त नी रहा मेरा ..मुझे  सतीश ने सब बता दिया था ...आप तो  गायब ही हो गए....तब से ......!!! हां  एक खुश खबर ...अप्रेल में शादी है मेरी बारातियों की तरफ से आना है  आपको ...सतीश और मैं आपकी बात अक्सर करते है....सतीश बहुत तारीफ करता है आज भी आपकी...पर वो भी आपसे कम नहीं हा हा हा """हम दोनों शादी करने जा रहे है...!!
........मेरे चेहरे पे जाने क्यूँ चमक सी आई.... एक ठंडी आह भी थी शायद ...बड़ा  सुकून मिला ....!!..इंसान हूँ न ..दर्द है तो सुकून भी चाहिए...!!


.....फिर से .धन्यवाद्   सतीश ..तुमने  आज फिर मेरी बांह पकड़ के सहारा दिया ...!खुश रहो भावना ..!!!

Thursday, March 3, 2011

विकास की कीमत

राजा भगीरथ जन अपने पुरखो को तारने के लिए गंगा मैया को स्वर्ग से गोमुख होते हुए पहाड़ो के   बीच  रास्ता  दिखाते हुए आगे आगे आ रहे थे तो रस्ते में तीनो भगवान(ब्रह्मा...विष्णु ..महेश )  बैठे थे . पहाड़ो में मचलती   ..छलकती .गंगा माता उन्हें नमन करने के लिए अपने बेग से थोडा शांत होकर  चलने लगी   तीनो हरि के विश्राम की जगह हो त्रिहरी  का नाम  इस जगह को   मिला....!!! आप देखेंगे मित्रो इस स्थान के बाद गंगा मैया स्थिर होके बहने लगती हैं फिर कलान्तरण में यह स्थान टिहरी हो गया...........
...टिहरी...अपने दो सौ सालो से भी कम उम्र जिया वो शहर ...जिसे बचपन से मैं अपने नानाजी के गाँव के नाम से जानता था....मेरे देखते ही देखते मेरी खुली आँखों में बीता हुआ सपना बन गया...!!
.....वो एतिहासिक रियासत  जिसे हिंदुस्तान की आजादी के बाद भी ..रजवाड़े से आजादी नहीं मिली..और यहाँ के लोगो ने गणतंत्र के बाद भी गुलामी देखी....
........... खैर  बात हो रही  है टिहरी के दफ़न होने की....!!!...मुझे अच्छी तरह याद है २००४ के वो दिन जब प्रथम चरण में झील का पानी रोकागया.......बदहवास लोग....बेतरतीब इन्सान हो गए....कुछ समझ नहीं....!!!
.......विकास की यह त्रासदी ....विनाश में सहयोगी रही है ...क्या आप जानते है....एशिया का सबसे बड़ा  और विश्व का तीसरा  यह   बांध ..अपने आगोश में क्या कुछ समां गया....????
...सरसरी तौर पर देखे तो ४८ से ५० किलोमीटर वर्ग फुट फैली हुई यह  झील करीब २७५ गाँव पूरी तरह से एवं १४० गाँव आंशिक रूप से डुबाकर लाखो घरो को पानी  के अंधेरों में समाकर ..हमारी दिल्ली ,पंजाब हरियाणा ..उत्तर प्रदेश को जगमगा रही है....??
.....
विकास  की बहुत बड़ी कीमत चुकाकर ...आज भी हजारो लोग घर और खेती से महरूम हैं,,,,सरकार ने मुआवजा दिया...लेकिन आम आदमी सरकारी नीतियों में उलझ के रह गया ...जिसका घर डूबा और खेत बच गए...उसे घर का मुआवजा मिला खेतों का नहीं....जिसके खेत डूबे और घर बच गया उसे खेतो का मुआवजा मिला घर का नहीं...ये भारतीय कानून का इंसाफ है...!! आप भी इस कानून के साथ हो सकते हैं....लेकिन जिसने पहाड़ की भोगोलिक परिस्थितियों को समझा है....जिसको पहाड़ी रहन सहन ...खेत खलिहान ...रस्ते जंगल की स्थिति का अहसास है ..वो इस बात को सुनके सन्न रहा जायेगा....शायद ठगा हुआ भी महसूस करे,,,,!!
......मगर मित्रो यह सच है....एक ही गाँव के लोग भाई बंधू नाते रिश्तेदार छिन्न भिन्न कर दिए विस्थापन की प्रक्रिया ने....!!...कुछ गरीब लोग आज भी बिभिन्न बिभागों के दफ्तरों में अपने मुआवजे के लिए ...सरकारी मशीनरी की डांट खाते देखे जा सकते हैं....!!!
,,,,,,टिहरी की गलियों में आखिरी बार मैं तब गुजरा जब मुझे अपना मूल निवास प्रमाण पत्र बनाना था...चूँकि  वो मेरा जिला मुख्यालय था...और किसी भी सम्बंधित काम के लिए अधिकारी गण वह आसीन होते ....
.....कदम कदम पे मेरा कवी ह्रदय इस शहर के इस अजाम को सोच रहा था......
.......यहाँ के राज नरेश बड़े प्रसिद्ध हुए हैं...और श्री बद्री विशाल की उन पे बड़ी कृपा थी... बद्री नाथ जी साक्षात् दर्शन देकर अपना फैसला सुनते थे "टिहरी राज शाही में "बोलंदा बद्री" पर अनेक कथाएं प्रचलित हुई आज भी सुनी जा सकती हैं.....!!!.....क्रमश.... .... n

Monday, February 28, 2011

महिमा सुरकंडा की

....मित्रो ..यह ब्लाग "सुरकंडा के आँचल से " ही क्यों....आइये कुछ छोटी सी पहचान दिए देता हूँ....!!
           ...यूँ तो देवभूमि उत्तराखंड देवताओं  से और तीर्थो से सजी हुई है..और हर पर्वत पे कही न कही किसी देवता का वास है .  मेरा गाँव "हवेली" भी माता सुरकंडा के पावन चरणों में निवास करता है...!!.ठीक ५०० मीटर नीचे ...!!.संक्षेप में एक परिचय ...











..."बात तब की है जब राजा दक्ष हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में यज्ञ कर रहे थे...और अपने दामाद भगवान शंकर को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया ..तो सती माता ने क्रोध में आकर यज्ञ कुंड में आत्म दाह कर लिया...भगवान शिव तांडव करते हुए उनके मृत शरीर को उठाया तीनो लोक में घुमाया.....उनके शारीर के अंग जिस जगह भी गिरे वो जगहे सिध्ह्पीठ कहलाई...!! चूँकि इस पर्वत पर (समुद्र तल से २७५७ मीटर ऊंचाई )..माता  का सिर गिरा था तो यह जगह सुरकंडा के नाम से प्रसिद्द  हुई...!
..... इस     सम्बन्ध में आपको कई लोक कथाएं अन्य श्रोतों से भी मिल जाएँगी ..जिस  सत्य घटना का जिक्र यहाँ पे मैं कर रहा हूँ वह शायद अन्यत्र न हो....!!








....  गाँव में एक अनपढ़ लोहार था गरीब दुर्बल निष्कपट ..गाँव के खेती के औजार ठीक कर के और  थोड़ी  बहुत मजदूरी करके अपनी जीविका चलाता था   ...मैंने  भी अपनी आँखों से देखा उसे...कहते हैं एक बार माँ उसके सपने में आके बोली..."सौण्या... मेरे शेर के पैर में बहुत बड़ा कांटा घुस गया है...तू अपनी भट्टी में बड़ा सुआ तैयार कर ..... कल रात मंदिर के पीछे जंगल में आके उसके पंजे से वो कांटा निकाल दे...!!"
...सौण्या ने किसी को कुछ नी बताया  लेकिन डरते पड़ते अपना लोहे का सुआ लेकर .माँ की बताई हुई जगह पहुँच गया ..कांटा निकला और डर के हांफता हुआ घर आ गया  ..पत्नी जाग गई ..बोली ...इतनी रात को कहा गए थे...???. 
......डरते सहमते सौण्या ने सारी बात बताई तो ..पत्नी बोली ..घर में कुछ भी नहीं है...माँ से कुछ माँगा भी....????...हक्का बक्का सौण्या इतना ही कह सका मुझे पंजे के सिवा कुछ भी नहीं दिखा ...क्या मांगता ...???
..सौण्या "दिदा" (पहाड़ों में अधिकतर लोहार के लिए बड़े भाई का संबोधन )अब  इस  दुनिया में नहीं है दोस्तों ....!! १२० साल तक जिया वो...!!! स्कूल के दिनों मेंआते जाते उनको  हुक्का गुड गुड़ाते हुए मैंने  उनके घर के बहार  सैकड़ों बार देखा उन्हें... 

...बहरहाल उनके तीन बेटे है.....एक बेसिक शिक्षा अधिकारी.....,,,,एक बैंक में जोनल मैनेजर ...,,,, एक ओ० एन० जी० सी० में डिप्टी डारेक्टर......!! !!

........बिन मागे माँ ने बहुत कुछ दे दिया था उन्हें........!!!

Sunday, February 27, 2011

सदाए पीछा करती हैं

इंटरमीडिएट एक साथ किया था सबने...!!
सब लोग बड़े खुश थे एक बड़ी सी कक्षा में से  ७ लोग अलग अलग गाँव से हम भी अपने भविष्य के सपनो में डूबे हुए...!! जैसा की अमूमन गाँव के स्कूल में होता है...!...कोई फौज में जाने की सोच  रहा था ...कोई आगे की पढाई की... कोई ..नजदीक के बड़े शहर दिल्ली जाके कोई नौकरी पकड़ के घर परिवार की माली हालत जल्दी सुधारना चाहता था....!!
खैर दोस्तों.....सबके अपने सपने सच करने का वक्त पास आ गया था...!!
.........मैं आगे की पढाई के लिए देहरादून आ गया...,मंजू...जीतू...रोली ..दिल्ली चले गए...!! बुद्दी अपने गाँव में प्रधान का लड़का था...उसके घर में नौकरी का महौल नहीं था...! उसकी शादी हो चुकी थी और ३ महीने की बच्ची का बाप था वो..!!..वरनी...का मकान का काम था..सो वो कुछ दिन के लिए कही नहीं गया...!!
......रीमा लड़की थी ..उसकी शादी की तैयारियां जोरो पर थी....!!
...इस कहानी में सबसे जादा टीस इसी बात को लेकर उठती है की जिंदगी है क्या....??? क्यूँ वो लोग इतने कम समय लेके आये...? वो सिर्फ ३ महीने के अंतर में एक दुसरे को पुकारते हुए कहा गुम हो गए...??? क्यूँ वो लोग बार बार याद आतें है...??
....शुरुआत रीमा से करता हूँ.....वो चंचल पहाड़ी देवी ..एक बहुत कोमल मन की  लड़की....सुबह सात बजे बिस्तर से उठकर हाथ में पानी का लोटा लिए छत के कोने पे मुंह धोने के लिए आई...अचानक क्या देखती है...सामने पहाड़ी सड़क पे गुजरते हुए ट्रक को ५०० मीटर गहरी खाई में लुढ़कते हुए....वो ट्रक भी पहचान गई ..और उसी के गाँव के लोकल ड्राईवर लड़के को भी.....अधखुली आँखों ने दिमाग को बहुत बुरा सन्देश दे दिया...और वो इसी सदमे में अपना नियंत्रण खो बैठी दिमाग पर ...!!!..एक महीने तक टोने टोटकों और जिंदगी की जद्दोजहद से हर गई वो....!!
....दूसरा वरनी....अपने घर बनाने के लिए ..रेत-बजरी या पत्थर के खान में .दब गया ...जिंदगी ने एक भी सांस उधार नहीं दी उसे..!!
.....तीसरा बुध्ही  ...रात में किसी सांप ने कटा ..और छौड़ गया  अपने पीछे  बीबी और ३-४ महीने की बच्ची..!! न जाने कितनी ना इंसाफी  हो जाती है खुदा के घर ..
...जीतू  ..को दिल्ली की बेलगाम बस निगल गयी....!!
.... पहाड़ी झरनों में मुह लगाके पानी पीने वाला मंजू दिल्ली के १ रुपये का गिलास पानी नहीं पचा सका ..और एक रात के डायरिया में चल बसा....!!
...रोली को दिल्ली की प्लास्टिक फक्ट्री का धुँआ खा गया .१ महीने तक वो भी खून की उल्टियों के बीच अलविदा कह गया...!!!

...बस एक सवाल है... उससे..... जिसकी हुकूमत जहा पे चलती है..की अगर ऐसा ही करना है तो क्या   जरुरत क्या है  किसी  को  दुनिया में लाने.....की...क्या जरुरत  है माँ बाप के सपने सजाने की....क्या जरुरत है दोस्तों को बनाने की...!!! 

Saturday, February 26, 2011

दूसरा रास्ता नहीं था क्या...?

....प्रभा दी को मैंने तकरीबन 13 साल बाद देखा...एक छोटे से क्लिनिक की  हाल में ...!!! कितनी बदल गयी हैं...मुझे पहचान  नहीं पाई वो...मैं भी अनजान बना  रहा ...मेरी उम्र में ही हैं वो...मगर ममेरी दीदी की सहेली थी ..तो दी ही कहता था मैं......वो बहुत सीढ़ी सादी लड़की मैं उनके साथ अक्सर  बाजार  जाता था जाने वो लोग मुझे ही क्यूँ लेते थे...तिब्बती मार्केट की दूरी किशन नगर से ३ मील होगी...६ मील उनके साथ मैं पैदल जाता था....और शायद २ रूपये की मूग वाली नमकीन मिलती थी खाने को....
........बहरहाल.... प्रभा दी के दो छोटे भाई हैं...पिताजी नहीं थे उनके ..शुरू से ही..एक बड़ा सा घर छोड़ गए थे...किराये के पैसों से ही जीवन यापन होता था,,,,उन्होंने पढाई की....खुद.. बी0  काम, एम० काम ..फिर बी एड ,,,एम् एड...सब अच्छी श्रेणी में....!!!और डिग्री कालेज में प्रोफेसर  हो गई..हैं इतनी खबर मुझे फोन पे घर में बातों के दौरान मिली थी...!!!
..वो बहुत शांत रहती थी..मगर किसी चर्चा में उनके अन्दर सरस्वती आ जाती थी...दुर्गा रूप में...!मैंने कभी किसीविषय पे उन्हें किसी सी हारते हुए नहीं  देखा...!! लेकिन आज उनके बारे में जान ने को मन हुआ...
...कुछ भारी मन से घर आया ...ममेरी बहन को फोन लगाया और छूटते ही बोला..दीदी ..प्रभा दीदी के बारे में बताओ....
" आनंद उसने जीवन भाइयों का जीवन सवारने में और माँ की हिफाजत में लगा दिया...पता ही मेरी शादी के दिन वो बहुत रोई और कहने लगी थी उमा तेरी शादी में अपनी शादी देख ली मैंने  ...मैं शायद अगले दस सालो तक भी ये सपना नहीं सजा सकूंगी...महेश को इंजीनियरिंग करानी है ..सुमित को  ऑस्ट्रेलिया जाना है ...मैं शादी कर लूँगी..तो  सबके सपने बिखर जायेंगे...माँ  एक दिन दवा न मिले तो वो उठ भी नहीं पाती .... पापा मुझे बड़ा बेटा कहते थे...उनका दिया काम  बाकी है ....!!!"
........मैंने फोन रख दिया...!!!
...सुमित ...महेश तो अपनी पत्नियों के साथ ऑस्ट्रेलिया में हैं..मुझसे बात भी हो जाती है...मगर बड़ा बेटा इतनी गुमनामी में जी गया...वो सहारे होते भी बेसहारा दिखा वो मुझे ....!!!

.....प्रभा दी .!!!!..आप के पास दूसरा रास्ता नहीं था क्या...? ???

Wednesday, February 23, 2011

बड़ी
गहरी उदासी है
कभी
मिलने चले आओ
हमारी
रूह प्यासी है
कभी
मिलने चले आओ ....!!!!

लबों पर
आखिरी दम है
कभी
मिलने चले आओ
हमें
मोहलत जरा कम है
कभी
मिलने चले आओ....!!!

हमारी
साँस थोड़े है
कभी
मिलने चले आओ
लो
हमने हाथ जोड़े हैं
कभी
मिलने चले आओ...!!!!